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Sunday, January 9, 2011

दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ

दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ या-रब
क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो

शोरिश से भागता हूँ दिल ढूँढता है मेरा
ऐसा सुकून जिसपर तक़दीर भी फ़िदा हो

मरता हूँ ख़ामुशी पर यह आरज़ू है मेरी
दामन में कोह  के इक छोटा-सा झोंपड़ा हो

हो हाथ का सिरहाना सब्ज़े  का हो बिछौना
शरमाए जिससे जल्वत ख़िलवत  में वो अदा हो

मानूस  इस क़दर हो सूरत से मेरी बुलबुल
नन्हे-से उसके दिल में खटका  न कुछ मिरा हो

आग़ोश में ज़मीं की सोया हुआ हो सब्ज़ा
फिर-फिर के झाड़ियों में पानी चमक रहा हो

पानी को छू रही हो झुक-झुक के गुल की टहनी
जैसे हसीन  कोई आईना देखता हो

फूलों को आए जिस दम शबनम  वज़ू  कराने
रोना मेरा वज़ू हो, नाला मिरी दुआ हो

हर दर्दमंद दिल को रोना मेरा रुला दे
बेहोश जो पड़े हैं, शायद उन्हें‍ रुला दे

अनोखी वज़्अ है सारे ज़माने से निराले हैं

अनोखी वज़्अ[1] है सारे ज़माने से निराले हैं
ये आशिक़ कौन-सी बस्ती के यारब रहने वाले हैं

इलाजे-दर्द में भी दर्द की लज़्ज़त पे मरता हूँ
जो थे छालों में काँटे नोक-ए-सोज़ाँ से निकाले हैं

फला फूला रहे यारब चमन मेरी उम्मीदों का
जिगर का ख़ून दे दे के ये बूटे मैने पाले हैं

रुलाती है मुझे रातों को ख़ामोशी सितारों की
निराला इश्क़ है मेरा निराले मेरे नाले हैं

न पूछो मुझसे लज़्ज़त ख़ानुमाँ-बरबाद[2] रहने की
नशेमन सैंकड़ों मैंने बनाकर फूँक डाले हैं

नहीं बेग़ानगी[3] अच्छी रफ़ीक़े-राहे-मंज़िल[4] से
ठहर जा ऐ शरर[5] हम भी तो आख़िर मिटने वाले हैं

उमीदे-हूर ने सब कुछ सिखा रक्खा है वाइज़ को
ये हज़रत देखने में सीधे-सादे भोले-भाले हैं

मेरे अश्आर ऐ इक़बाल क्यों प्यारे न हों मुझको
मेरे टूटे हुए दिल के ये दर्द-अंगेज़ नाले हैं

शब्दार्थ:
  1. ↑ रूप ,आकार, आकृति, रूप-रंग
  2. ↑ बेघर
  3. ↑ दूरी
  4. ↑ सहयात्री
  5. ↑ चिंगारी

अक़्ल ने एक दिन ये दिल से कहा

अक़्ल ने एक दिन ये दिल से कहा
भूले-भटके की रहनुमा हूँ मैं

दिल ने सुनकर कहा-ये सब सच है
पर मुझे भी तो देख क्या हूँ मैं

राज़े-हस्ती को तू समझती है
और आँखों से देखता हूँ मैं