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Sunday, January 9, 2011

एक दफ़नाई हुई आवाज़

फूलों और किताबों से आरास्ता[1] घर है
तन की हर आसाइश देने वाला साथी
आँखों को ठंडक पहुँचाने वाला बच्चा
लेकिन उस आसाइश, उस ठंडक के रंगमहल में
जहाँ कहीं जाती हूँ
बुनियादों में बेहद गहरे चुनी हुई
एक आवाज़ बराबर गिरयः[2] करती है
मुझे निकालो !
मुझे निकालो !

शब्दार्थ:
  1. ↑ सुसज्जित
  2. ↑ विलाप